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रघुवीर सहाय की कविता : Checkout Latest poem of Raghuveer Sahay

Posted on September 18, 2023September 18, 2023 by ANDREW

रघुवीर सहाय : जब भी हमें अपने काम से छुटकारा मिलता है तो हम कुछ ना कुछ ऐसी एक्टिविटी करना पसंद करते हैं, जिसमें हमारा इंटरेस्ट होता है। बहुत सारे लोगों को खाली समय में कविताएं पढ़ने अच्छा लगता है। आज हम आपके लिए रघुवीर सहाय जी की कुछ चुनिंदा कविताएं अपने आर्टिकल के माध्यम से लेकर आए हैं। रघुवीर सहाय जी का जन्म उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 9 दिसंबर को 1929 को हुआ था। रघुवीर सहाय जी अपने समय के एक बहुत ही प्रभावशाली और चर्चित रहे हैं। द्वारा लिखी गई बहुत सारी कविताएं, पुस्तक एवं काव्य संग्रह आज भी लोगों को प्रभावित करते हैं।

यदि आपको कविताएं पढ़ने अच्छा लगता है और आपको रघुवीर सहाय जी की कविताएं पसंद है तो हमारे आर्टिकल को अंत तक अवश्य पड़े क्योंकि आज हम आपको सहायक जी की कुछ चुनिंदा कविताओ के बारे में जानकारी प्रदान करने वाले हैं। इस मशहूर लेखक की कुछ चुनिंदा कविताएं इस प्रकार हैं कि 

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Table of Contents

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  • 1-रघुवीर सहाय : आज फिर शुरू हुआ
  • 2-रघुवीर सहाय : मेरे अनुभव  
  • 3-रघुवीर सहाय :  डर
  • 4-रघुवीर सहाय :  ठंड से मृत्यु
  • 5-रघुवीर सहाय : आपकी हँसी

1-रघुवीर सहाय : आज फिर शुरू हुआ

रघुवीर सहाय

आज फिर शुरू हुआ जीवन

आज मैंने एक छोटी-सी सरल-सी कविता पढ़ी, आज मैंने सूरज को डूबते देर तक देखा,

जी भर आज मैंने शीतल जल से स्नान किया,

आज एक छोटी-सी बच्ची आई,

किलक मेरे कन्धे चढ़ी

आज मैंने आदि से अन्त तक पूरा गान किया

आज फिर जीवन शुरू हुआ।

व्याख्या

इस कविता के माध्यम से लेखक द्वारा कहा जा रहा है कि वक्त चाहे जैसा भी हो जिस प्रकार रात के अंधेरे के बाद सुबह एक नई रोशनी लेकर आती है इस तरह आपको अपना जीवन फिर से एक बार नहीं उम्मीद के साथ जीने की कामना करनी चाहिए। जैसे ही हम सुबह एक नई उम्मीद के साथ उठते हैं तो हमारी नजरे सबसे पहले सूर्य के प्रकाश की ओर जाती हैं और उसके बाद शीतल जल से स्नान करने के बाद मन में एक सुकून की भावना पैदा होती है। इस कविता का उद्देश्य केवल इतना ही है कि दिन की शुरुआत हमेशा यह सोचकर करनी चाहिए कि आज एक बार फिर से जीवन शुरू हो रहा है।

2-रघुवीर सहाय : मेरे अनुभव  

कितने अनुभवों की स्मृतियाँ

ये किशोर मुँह जोहते हैं सुनने को

पर मैं याद कर पाता हूँ तो बताते हुए डरता हूँ
कि कहीं उन्हें पथ से भटका न दूँ
मुझे बताना चाहिए वह सब
जो मैंने जीवन में देखा समझा
परन्तु बहुत होशियारी के साथ
मैं उन्हें अपने जैसा बनने से बचाना चाहता हूँ।

व्याख्या

इस कविता के माध्यम से लेखक द्वारा बताया जा रहा है कि हर किसी की जिंदगी में बचपन से लेकर जवानी तक जुड़ा हुआ एक अनुभव होता है। बहुत सारे लोगों को आज भी बचपन का अनुभव जहां वह सबसे ज्यादा खुश हुए होंगे कुछ ना कुछ सीखना है और आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है उसी प्रकार हमारे जीवन में कुछ खराब अनुभव भी गुजरता है वह खराब अनुभव भी हमें बहुत कुछ सीख कर जाता है और हमें एक बार फिर से गिरकर उठने की प्रेरणा देता है और सफलता की और धकेलता है। कविता का उद्देश्य केवल इतना ही है कि हमेशा उन अनुभवों से कुछ ना कुछ सीखना चाहिए।

3-रघुवीर सहाय :  डर

रघुवीर सहाय

बढ़िया अँग्रेजी

वह आदमी बोलने लगा

जो अभी तक

मेरी बोली बोल रहा था

मैं डर गया।

व्याख्या

इस कविता के माध्यम से लेखक द्वारा बताया जा रहा है कि कुछ लोग अपनी जिंदगी को इस तरह बदल लेते हैं कि वह अपनी भाषा छोड़कर बढ़िया अंग्रेजी बोलने लग जाते हैं। बहुत सारे लोग ऐसे भी होते हैं जो कभी अपनी मातृभाषा हिंदी से दूर ही नहीं जा पाए मैं तो अपनी मातृभाषा छोड़ने के ख्याल से ही डर जाते हैं। कविता का उद्देश्य केवल इतना ही है कि अपनी मातृभाषा बोलने में कभी भी हिचकीचाहत झिझक महसूस नहीं होनी चाहिए।

4-रघुवीर सहाय :  ठंड से मृत्यु

फिर जाड़ा आया फिर गर्मी आई

फिर आदमियों के पाले से लू से मरने की खबर आई

न जाड़ा ज्यादा था न लू ज्यादा

तब कैसे मरे आदमी

वे खड़े रहते हैं तब नहीं दिखते,

मर जाते हैं तब लोग जाड़े और लू की मौत बताते हैं।

व्याख्या

इस कविता के माध्यम से लेखक द्वारा बताया जा रहा है की मौसम का हाल चाहे कुछ भी हो लेकिन जब ऊपर वाले की तरफ से जिंदगी की सांस रोकने का आदेश आ जाता है, तो बहुत सारे बहाने बन जाते हैं जैसे कि किसी की ठंड से मृत्यु हो जाती है,तो कोई गर्मी के कारण लगने वाली लू से मर जाता है। इस कविता का उद्देश्य केवल इतना ही है कि मौत इंसान को कभी भी अपनी और खींच सकती है लू लगना या ठंड के कारण मौत हो जाना यह सिर्फ दिल को समझने के लिए बहाने होते हैं।

5-रघुवीर सहाय : आपकी हँसी

रघुवीर सहाय

निर्धन जनता का शोषण है

कह कर आप हँसे

लोकतंत्र का अंतिम क्षण है

कह कर आप हँसे

सबके सब हैं भ्रष्टाचारी

कह कर आप हँसे

चारों ओर बड़ी लाचारी

कह कर आप हँसे

कितने आप सुरक्षित होंगे

मैं सोचने लगा

सहसा मुझे अकेला पा कर

फिर से आप हँसे।

व्याख्या

इस कविता के माध्यम से लेखक द्वारा बताया जा रहा है कि अपने जीवन में हमें बहुत सारे लोग ऐसे मिलते हैं जो हमेशा दूसरों पर हंसते रहते हैं। कुछ लोग इतनी गिरी हुई जहनियत के होते हैं कि यदि जनता का शोषण भी हो जाए तब भी वह लोग हंसते रहते हैं और देश के नेता कितने ही भ्रष्ट क्यों ना हो जाए तब भी मैं हंसते रहते हैं। हंसने से पहले यदि आप एक बार सिर्फ इतना सोच लीजिए कि आने वाले समय में क्या आप इस देश में सुरक्षित रहेंगे। इस कविता का उद्देश्य केवल इतना ही है की परिस्थितियों में सोच समझकर किसी दूसरे पर हंसना चाहिए, क्योंकि आपको नहीं पता कब, कहां आप किसी की हंसी के पात्र बन जाए।

हम आशा करते हैं दोस्तों के आपको रघुवीर सहाय जी की कविताएं पढ़कर अवश्य ही जीवन में किस प्रकार आगे बढ़ाना है उसकी प्रेरणा मिली होगी। इन कविताओं को पढ़कर हम विश्वास से कह सकते हैं कि आपको जरूर इन कविताओं से कुछ ना कुछ सीखने को मिला होगा जो आपके भविष्य में आपकी बहुत काम आएगा। अभी हम आपके लिए इसी तरह के आर्टिकल्स लिखते रहेंगे और आप हमेशा की तरह अपना प्यार हो सपोर्ट बनाए रखें।

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